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    नवप्रवर्तन

    क्रिएटिविटी, वैज्ञानिक सोच और इनोवेटिव सोच को बढ़ावा देना

    केंद्रीय विद्यालय (OIL), डुलियाजान, छात्रों के बीच इनोवेशन, क्रिएटिविटी, वैज्ञानिक जांच और अनुभव-आधारित सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालय छात्रों को आलोचनात्मक सोच रखने, नए विचारों को खोजने, असल ज़िंदगी की समस्याओं की पहचान करने और मिलकर सीखने व प्रैक्टिकल गतिविधियों के ज़रिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

    इनोवेशन के प्रति हमारा दृष्टिकोण क्लासरूम की पढ़ाई को असल दुनिया के इस्तेमाल से जोड़ने, पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देने, डिजिटल साक्षरता को मज़बूत करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार वैज्ञानिक जांच की भावना को विकसित करने पर केंद्रित है।

    1. लिटिल ओपन लाइब्रेरी: क्लासरूम से परे सीखना

    *लिटिल ओपन लाइब्रेरी* पहल छात्रों को पढ़ने की आदतें विकसित करने, नए विचारों को खोजने और स्वतंत्र रूप से सीखने के लिए प्रोत्साहित करती है। पढ़ने की सामग्री तक आसान पहुँच और साथियों से सीखने (पीयर लर्निंग) को बढ़ावा देकर, यह पहल क्रिएटिविटी, कल्पनाशीलता, बातचीत के कौशल और जीवन भर सीखने के प्रति लगाव को समर्थन देती है।

    2. पर्यावरण संबंधी इनोवेशन और टिकाऊ तौर-तरीके

    विद्यालय इको क्लब और मिशन LiFE से जुड़ी गतिविधियों के ज़रिए पर्यावरण के प्रति जागरूकता और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देता है। स्कूल की हालिया गतिविधियों में रंग-कोड वाले डिब्बों (बिन्स) के इस्तेमाल से कचरे को सही ढंग से अलग करने, कचरे के ज़िम्मेदार निपटान, स्वच्छता और रीसाइक्लिंग के महत्व पर ज़ोर दिया गया है।

    ये पहल छात्रों को पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार आदतें अपनाने और यह समझने के लिए प्रोत्साहित करती हैं कि कैसे सरल, व्यावहारिक काम एक साफ़ और स्वस्थ पर्यावरण में योगदान दे सकते हैं।

    3. वैज्ञानिक सोच और छात्रों का इनोवेशन

    छात्रों को अपने आस-पास की चीज़ों को देखने, रोज़मर्रा की चुनौतियों की पहचान करने और वैज्ञानिक व सामाजिक उपयोग वाले इनोवेटिव विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। INSPIRE-MANAK योजना कक्षा VI से X तक के योग्य छात्रों के बीच मौलिक विचारों को विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।

    विज्ञान-आधारित गतिविधियों, प्रोजेक्ट वर्क, मॉडल बनाने और समस्या-समाधान के अभ्यासों के ज़रिए, विद्यालय छात्रों में जिज्ञासा, तार्किक सोच, प्रयोग करने और खोज की भावना विकसित करने का प्रयास करता है।

    4. डिजिटल लर्निंग और ICT का एकीकरण

    विद्यालय शिक्षण-सीखने के अनुभवों को बेहतर बनाने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के सार्थक उपयोग को बढ़ावा देता है। डिजिटल संसाधन, कंप्यूटर-आधारित गतिविधियाँ और तकनीक-समर्थित शिक्षा छात्रों को कम्प्यूटेशनल सोच, डिजिटल साक्षरता, शोध कौशल और उभरती हुई तकनीकों की समझ विकसित करने में मदद कर सकती है। छात्रों को ज़िम्मेदार डिजिटल नागरिकता, साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के नैतिक इस्तेमाल का अभ्यास करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।

    5. क्रिएटिविटी, कम्युनिकेशन और डिज़ाइन थिंकिंग:

    ड्राइंग, भाषण प्रतियोगिताएं, प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन और मिलकर किए जाने वाले असाइनमेंट जैसी क्रिएटिव गतिविधियां छात्रों को अपने विचार व्यक्त करने, प्रभावी ढंग से बातचीत करने और चुनौतियों को अलग-अलग नज़रिए से देखने का मौका देती हैं। विद्यालय छात्रों में आत्मविश्वास, टीमवर्क, क्रिएटिविटी और विचारों को सार्थक नतीजों में बदलने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

    6. सस्टेनेबल भविष्य के लिए इनोवेशन:

    केंद्रीय विद्यालय (OIL), डुलियाजान में, इनोवेशन को एक बार की गतिविधि के बजाय सीखने की एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है। विद्यालय ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करता है जहाँ छात्रों को सवाल पूछने, प्रयोग करने, गलतियों से सीखने और समाज को फायदा पहुँचाने वाले समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। छात्रों की भागीदारी, शिक्षकों के मार्गदर्शन और गतिविधि-आधारित शिक्षा के माध्यम से, विद्यालय ऐसे ज़िम्मेदार, क्रिएटिव और भविष्य के लिए तैयार नागरिक तैयार करना चाहता है जो ‘विकसित भारत’ के विज़न में सार्थक योगदान दे सकें।

    हमारा मोटो:रचनात्मक रूप से सोचें। वैज्ञानिक रूप से खोज करें। ज़िम्मेदारी से इनोवेशन करें।*